Friday, October 5, 2007

उन्माद...


शीतल सी चाँदनी भी

उन्माद भरा ये मन भी

गाती हूँ गीत तेरे ही

ले आज की रात भी

हर्ष इस उर में भी

हर्षित मेरा तन भी

स्वरों ने तेरे बहला दिया

ले आज की रात भी

मृगी सी कातरता-

इस बेला भी

तेरे स्पर्ष से सहमती

ले आज की रात भी!!

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